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नियति को नहीं बल्कि सरकार को युवाओं को रोजगार देना मंजूर नहीं

वैसे तो संविधान ने सभी को सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार दे रखा है पर क्या आज युवा सम्मानजनक जीवन

अक्ल बड़ी या भैंस

बहस वाजिब है या नहीं, ये तो नहीं पता, लेकिन इस बहस ने भैंस को जरूर परेशान कर रखा है।

रूप का अभिमान

‘अरीना को खाना बनाने की क्या ज़रूरत है? तुम्हारे घर तो कुक और सर्वेंट होंगे ही न।’ “क्या पूरे दिन

एक पेड़ माँ के नाम

– एक पेड़ माँ के नाम: पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का संकल्प   –  एक पेड़ माँ के नाम: पर्यावरण संरक्षण का

पर्यावरण और बुलबुला

तारिका और आर्या पक्की सहेलियां थीं। एक दिन आर्या ने कहा, “तारिका चलो, हम बुलबुलों के साथ खेलते हैं।” “हां

मरी हुई कौम

‘‘मरी हुई कौम’’ का अर्थ केवल उन लोगों से नहीं है जिनकी सांसें थम चुकी हों, बल्कि उससे कहीं अधिक

गन्दा गलियारा राजनीति का

गलियारे गन्दे होते हैं तो सफाई की जाती है, ज्यादा बदबूदार हो गए हांे तो चुना डालकर, फिनायल से सफाई

काव्य प्रहर नवंबर २०२४ ई-पत्रिका

आदरणीय/आदरणीया नमस्कार! पत्रिका पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें 👇 काव्य प्रहर ई मैगज़ीन – नवंबर २०२४

काव्य प्रहर ई पत्रिका- दिसंबर २०२४

आदरणीय/आदरणीया नमस्कार! पत्रिका पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें काव्य प्रहर ई पत्रिका- दिसंबर २०२४ नोट- पत्रिका

काव्य प्रहर ई पत्रिका- जनवरी २०२५

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