चँदा मामा नहीं दूर के
रचयिता: कवि पृथ्वीसिंह बैनीवाल बिश्नोई, हिसार (हरियाणा)- भारत चंदा मामा चंदा मामा,प्यार प्यारे चंदा मामा।दूर नभ रहते थे,लगते प्यारे
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Read Moreरचयिता: व्यग्र पाण्डे, गंगापुर सिटी (राज.) जैसे जैसे समय बढ़ रहावैसे बढ़ रहे होंगे तुम भीहोगी चंद्र-मिलन की चाहयहाँ भी
Read Moreरचयिता: केशव विवेकी देशहित को आगे रख के,जीत हुई आज हमारी है।प्रयास सबका सफल हुआ,अब चाँद पे अपनी पारी है।
Read Moreरचयिता: महेश गुप्ता जौनपुरी दिन रात एक करके परिवार को पालता हूँ,रोटी के निवाले को मैं बांट-बांट कर खाता हूँ।कम
Read Moreलेखक : तरुण कुमार दाधीच, वरिष्ठ साहित्यकार, उदयपुर हिंदी साहित्य के आधुनिक काल में प्रमुख गद्य लेखकों में अमृतलाल नागर
Read Moreरचयिता: केशव विवेकी ऐ मेरे साथी! जरा बता दो अभी,मैं पीठ पर बोरा और तू बस्ता रखा।उम्र में दोनों छोटे
Read Moreकवि : अदम गोंडवी, गोंडा, उत्तर प्रदेश आइए महसूस करिए जिंदगी के ताप कोमैं चमारों की गली तक ले चलूँगा
Read Moreलेखिका: प्रतिमा उमराव, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है।देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में
Read Moreलेखिका: सुनीता मिश्रा, भोपाल, मध्य प्रदेश छेड़िये इक जंग, मिल-जुल कर गरीबी के ख़िलाफ़ दोस्त, मेरे मजहबी नग्मात को मत
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