ग़ज़ल
मुस्कुराकर देखता हूँ। ग़म भुलाकर देखता हूँ। मैं बराबर ज़िन्दगी को, आज़मा कर देखता हूँ। वास्ता रखता वही हूँ ,
Read Moreतुम दिल की इतनी भोली हो,जैसे मछली को प्यास नही,कोई पूछे तुमसे कौन हूँ मैं,तुम कहना कोई खास नहीं। तू
Read Moreचलता फिरता घर है मेरा, चार चके हैं नीचे। दौड़ लगाता है सड़कों पर, अपनी आँखें मीचे। चलता फिरता गाना
Read Moreधरती का हर कण कहता है, मुझमें जीवन का सार बसता, नदियों की कल-कल ध्वनि में, भविष्य का मधुर स्वर
Read Moreमैं दीप नहीं जो बुझ जाऊँ, मैं सूर्य हूँ, फिर आऊँगा। विपदाओं के काले बादल चीर गगन पर छा जाऊँगा।
Read Moreरचयिता : कन्हैया लाल, जंगीपुर गाज़ीपुर भेज रही हूं राखी भईया,दुरुस्त सदा हो धर्म सनातन,रक्षाबंधन संदेश यही है,भाई-बहन का प्यार पुरातन,राखी
Read Moreरचयिता: कविदीप दिलीप, गाजीपुर, उत्तर प्रदेश क्या थे आजाद गांधी सुभाष,क्या रामप्रसाद क्या राजगुरु।अशफाक भगत क्या लाजपत,कौन कहां कब क्यों
Read Moreग़ज़लकार: हमीद कानपुरी (अब्दुल हमीद इदरीसी), कानपुर, उत्तर प्रदेश घूम कर ख़ूब दर बदर देखा।पर नबी सा नहीं बशर देखा। उसका
Read Moreकवि : ओमप्रकाश वाल्मीकि, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश चूल्हा मिट्टी कामिट्टी तालाब कीतालाब ठाकुर का। भूख रोटी कीरोटी बाजरे कीबाजरा खेत
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