ग़ज़ल
मुस्कुराकर देखता हूँ। ग़म भुलाकर देखता हूँ। मैं बराबर ज़िन्दगी को, आज़मा कर देखता हूँ। वास्ता रखता वही हूँ ,
Read Moreग़ज़लकार: हमीद कानपुरी (अब्दुल हमीद इदरीसी), कानपुर, उत्तर प्रदेश घूम कर ख़ूब दर बदर देखा।पर नबी सा नहीं बशर देखा। उसका
Read Moreरचयिता: हमीद कानपुरी (अब्दुल हमीद इदरीसी), कानपुर, उत्तर प्रदेश बदलते रूप हैं हर पल यहाँ दिलकश नज़ारों के।हमेशा एक से
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