जो डलहौज़ी न कर पाया वो ये हुक़्क़ाम कर देंगे
कवि : अदम गोंडवी, गोंडा, उत्तर प्रदेश जो डलहौज़ी न कर पाया वो ये हुक्काम कर देंगेकमीशन दो तो हिंदुस्तान
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Read Moreकवयित्री : सुभद्राकुमारी चौहान, प्रयागराज (इलाहाबाद), उत्तर प्रदेश सिंहासन हिल उठे, राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,बूढ़े भारत में भी आई
Read Moreरचयिता: हमीद कानपुरी (अब्दुल हमीद इदरीसी), कानपुर, उत्तर प्रदेश बदलते रूप हैं हर पल यहाँ दिलकश नज़ारों के।हमेशा एक से
Read Moreरचयिता: जितेन्द्र हमदर्द, लखनऊ अब तू ही बता मेरे दिल,उसके बिना क्या जीना।यह जाम भी नशा ना देगा,जब उसके बिना
Read Moreरचयिता: हरी राम यादव, अयोध्या, उत्तर प्रदेश चढ़ सफलता की सारी सीढ़ी,मामा के घर पहुंचा चंद्रयान -3।खुश होकर चंद्रयान ऐसा
Read Moreरचयिता: डोमेन्द्र नेताम (डोमू), बालोद (छ.ग) रिमझिम सावन की है फुहार,रक्षाबंधन की है पावन त्यौहार। सज-धज कर अब भाई बैठे
Read Moreरचयिता: दिवाकर अजीत, कानपुर, उत्तर प्रदेश तप्त हृदय को , सरस स्नेह से , जो सहला दे , मित्र वही है
Read Moreरचयिता: सुनील कुमार सुनहरा, गया, बिहार चले हैं हम इन शहरों से अपने बचपन के गाँव,जहाँ गुज़रा था अपना बचपना
Read Moreरचयिता: कवि पृथ्वीसिंह बैनीवाल बिश्नोई, हिसार (हरियाणा)- भारत चंदा मामा चंदा मामा,प्यार प्यारे चंदा मामा।दूर नभ रहते थे,लगते प्यारे
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