रूप का अभिमान
‘अरीना को खाना बनाने की क्या ज़रूरत है? तुम्हारे घर तो कुक और सर्वेंट होंगे ही न।’
“क्या पूरे दिन पढ़ती ही रहती है?” अरीना ने अपनी चचेरी बहन नतालिया से कहा।
“अरीना, हमारी परीक्षाएं अगले महीने ही हैं। डिग्री के फाइनल ईयर में पढ़कर फर्स्ट क्लास तो लाना ही है।”
“वह सब तू कर, मुझे तो उसमें कोई रुचि नहीं। हम लड़कियों को ज्यादा पढ़कर, ग्रेड लाकर क्या करना है? हमें तो रूप और ग्लैमर से किसी अच्छे पैसेवाले लड़के को फंसाकर मौजमजा करना है।” अरीना ने बेफिक्री से कहा और अपना मेकअप करने लगी।
“बहन, ऐसा नहीं है। केवल पैसे ही नहीं, पढ़ाई से व्यक्ति में स्मार्टनेस और ज्ञान आता है।” नतालिया समझाते हुए बोली।
“हां, हां, तेरे जैसी सांवली लड़की को तो पढ़ाई और नौकरी चाहिए ही। नहीं तो तुझे पसंद कौन करेगा?” कहकर अरीना हंसने लगी।
सांवली नतालिया चश्मा लगाती थी और उसका सामान्य-सा रूप था, जबकि अरीना गोरी और बहुत आकर्षक थी। नतालिया के पापा परेश और अरीना के पापा हरेंद्र को विरासत में बहुत बड़ी कोठी मिला था, इसलिए दोनों परिवार संयुक्त परिवार में ही रहते थे। हरेंद्र की नौकरी अच्छी थी और कंपनी की ओर से उन्हें दो साल के लिए अमेरिका पोस्टिंग मिली थी। वह वहां से पत्नी रूपा और बेटी अरीना को डालर भेजते रहते थे। पैसों की भरमार होने के कारण अरीना फिजूलखर्च, आवारा और उच्छृंखल बन गई थी।
नतालिया के पापा परेश की नौकरी साधारण थी। लेकिन उनकी पत्नी रेखा बहुत समझदार और घर संभालने वाली स्त्री थीं। वह घर और रसोई का सारा काम किया करती थीं और उन्होंने नतालिया को भी रसोई में निपुण बना दिया था।
अरीना को अपने रूप पर बहुत अभिमान था। उसकी मम्मी रूपा भी आलसी थीं और बारबार बाहर से ऑनलाइन खाना मंगवाती रहती थीं, इसलिए अरीना को न तो खाना बनाना आता था और न ही घर का काम। वह तो ब्यूटी पार्लर और रेस्तरां में ही घूमती रहती थी।
रविवार की शाम इंजीनियर युवक अशोक नतालिया को देखने आया था। उसका घर साधारण था, लेकिन उसका वेतन अच्छा था, इसलिए परेश ने यह मुलाक़ात तय की थी। अशोक को नतालिया का रूपरंग ज्यादा पसंद नहीं आया, लेकिन उससे हुई बातचीत में नतालिया की योग्यता और समझदारी पसंद आई। उसने अपनी मम्मी से सलाह की और घोषणा की कि लड़की पसंद है। अब सगाई कब करनी है, इस पर विचार करने बैठे थे।
अरीना को अपने कमरे में पता चला कि नतालिया की बात तय हो रही है। उसे जलन हुई कि उससे पहले उसकी सगाई नहीं होने दूंगी। वह उठकर ड्राइंगरूम में आ गई। उसे देखते ही अशोक और उसकी मम्मी पूछने लगी, “यह कौन है?”
“यह मेरे देवर की बेटी अरीना है।” रेखा ने कहा।
“हमें पहले अरीना दिखानी चाहिए थी न। अशोक को तो यही पसंद आ गई है।” अशोक की मम्मी सामने से बोलीं।
“अरीना के पापा तो अमेरिका में हैं। उनसे पूछना पड़ेगा।” परेश बोले।
“ठीक है, उनसे पूछ लीजिए।” कहकर दोनों उठ गए। नतालिया की सगाई की बात वहीं की वहीं रह गई।
अरीना तो केवल ईर्ष्या में रंग में भंग डालने आई थी। उसने तो अशोक के लिए ना कर दी और पूरी बात बिगाड़ दी। नतालिया दुखी होकर निराश हो गई।
अगले दिन हरेंद्र का फ़ोन आया। उनके मित्र का बेटा जिगर अमेरिका में कार्डियोलॉजिस्ट बनकर एक गुजराती लड़की पसंद करने आ रहा था। वह उनके घर ही रहने वाला है। उसे अरीना फोटो देखकर पसंद आ गई है। पांच-छह दिन उसका ध्यान रखना।
“हां, हां, हम उसका अच्छी तरह ध्यान रखेंगे। उसका फोटो भेज दीजिए।” रूपा खुश होते हुए बोलीं।
जिगर का फोटो देखकर अरीना उसके प्रेम में पड़ गई। अमेरिका में डाक्टर है, तो उसका कितना अधिक वेतन होगा। उसे तो अमेरिका की शानोशौकत के सपने आने लगे। वह सपने देखने लगी कि दोनों बड़ी लग्जरी कार में बैठकर नियाग्रा फाल्स घूमने जा रहे हैं। इस सपने से अरीना बहुत खुश हो गई। उसने मन ही मन निश्चय कर लिया कि अब उसे किसी भी तरह जिगर को अपना बनाना ही होगा।
अहमदाबाद एयरपोर्ट पर तैयार होकर अरीना और रूपा जिगर को लेने गईं।
“हाय, आई एम अरीना।” कहकर उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया।
जिगर सीधासादा और समझदार डेक्टर था। वह अरीना को देखता ही रह गया। घर पहुंचकर जब उसकी पहचान नतालिया से कराई गई, तो उसे नतालिया की सादगी बहुत अच्छी लगी।
रात के भोजन में बनी बिरयानी जिगर और उसकी मम्मी आरती को बहुत स्वादिष्ट लगी।
“वाह, बिरयानी बहुत अच्छी है। अरीना, यह तुमने बनाई है?” जिगर ने पूछा।
“नहीं, यह नतालिया ने बनाई है। अरीना को खाना बनाने की क्या जरूरत है? तुम्हारे घर तो कुक और सर्वेंट होंगे ही न।” अरीना की मम्मी रूपा उसकी तरफदारी करते हुए बोलीं।
दूसरे दिन सुबह अरीना और जिगर घूमने निकले। घर से बाहर निकलते ही एक वृद्ध दम्पति सड़क पार करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अधिक ट्रैफिक होने के कारण उन्हें कठिनाई हो रही थी।
अरीना झुंझलाकर बोली, “ऐसे बूढ़े-बूढ़ियां इस उम्र में घूमने क्यों निकल पड़ते हैं?”
उसी समय सामने से नतालिया आ रही थी। उसने परिस्थिति देखी, दोनों का हाथ पकड़कर उन्हें सड़क पार करा दी। जिगर यह सब देख रहा था।
अरीना बिगड़ते हुए बोली, “बेवजह मदद करने का दिखावा कर रही है।”
अरीना ने एसी टैक्सी की और जिगर को दो-तीन जगह घुमाया। फिर उसे आश्रम रोड के एक फाइव स्टार होटल में दोपहर के भोजन के लिए ले गई। भारत में हो रहे सुंदर विकास को देखकर जिगर बहुत खुश हुआ और उसकी प्रशंसा करने लगा। अरीना को लगा कि वह उसके रूप की प्रशंसा कर रहा है।
शाम को घर के बगीचे में दोनों हाथों में हाथ डालकर बातें कर रहे थे। तभी अचानक नतालिया वहां आ गई। उसे देखते ही जिगर ने हाथ छोड़ दिया और उठकर जाने लगा।
अरीना गुस्से से बोली, “क्या नतालिया को दिखाई नहीं देता कि हम दोनों प्रेमी बातें कर रहे थे?”
जिगर घर के अंदर जाते-जाते रुक गया और उनकी बातें सुनने लगा।
“सॉरी।” नतालिया बोली।
“दिखाई नहीं देता? अपने रूप और ग्लैमर से मैंने जिगर को पूरी तरह अपना दीवाना बना दिया है। वह पूरे दिन मेरे आगे-पीछे घूमता रहता है।” अरीना अभिमान से बोली।
जिगर यह सुनकर चौंक गया।
अगले दिन अंगूठी पहनाने के लिए जिगर की मम्मी खड़ी हुईं। अरीना ने अपना हाथ आगे बढ़ाया, लेकिन उन्होंने अंगूठी नतालिया को पहना दी।
जिगर ने कहा, “बहुत सोच-समझकर हमने नतालिया को चुना है। हमें खाना बनाने में निपुण, घर संभालने वाली, समझदार और दयालु लड़की चाहिए। केवल रूप की अब अमेरिका में कोई कीमत नहीं है। वहां तो गोरे लोग स्वयं धूप में जाकर टैनिंग करते हैं, ताकि साँवले दिखाई दें।”
अरीना और रूपा शर्म से देखते ही रह गए।

स्नेहा सिंह
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