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भारत एक खोज – नेहरू का भारत ! 

समय समय पर भारत में शासक बदलते रहे हैं। भारत भूमि और भारत की गद्दी पर सबों ने अपनी अपनी काबिलियत का डंका भी बजाते रहे हैं। कोई ताजमहल बना कर विश्व विख्यात हुआ, तो कोई इसरो, एम्स, आई आई टी, आई आई एम, जैसी राष्ट्रीय संस्थाओं को जन्म दिया और इतिहास में अमर हो गया। 

अब रिकार्ड तोड़ने की बात आई तो मुझे पंडित जवाहरलाल नेहरू की छवि अकस्मात याद आ गयी। वो जवाहरलाल नेहरू जो आधुनिक भारत का निर्माता कहे जाते हैं और जिसे बच्चे प्यार से चाचा नेहरू भी पुकारते रहे हैं। उसी चाचा नेहरू का रिकॉर्ड 9 जून को देश में टुटने जा रहा है। यह कोई लकड़ी टुटने जैसा नहीं है। न चप्पल का फीता टूटने जैसा है, रिकॉर्ड टूटने का मतलब इतिहास टुटने जा रहा है । इतिहास बदलने जा रहा है । वैसे तुलना भी पद और काम का होता है, नाम और कद का नहीं। कद से हाथी धरती का सबसे बड़ा जानवर होता है लेकिन रेस के मैदान में घोड़ा बाजी मार लेता है हाथी नहीं। पंडित जवाहरलाल नेहरू जैसे राजनेता का राजनीतिक इतिहास जिसने ” भारत एक खोज लिखी ” देश का आंखों देखा हाल लिखा। भारत के प्रधानमंत्री के रूप में जिसकी शुरुआत 15 अगस्त 1947 से हुई और 27 मई 1964 तक अनवरत जारी रहा। किसी देश के एक प्रधानमंत्री का लगातार 16 साल और 286 दिनों तक  देश का प्रधानमंत्री होने का गौरव नेहरू को प्राप्त था। दुनिया के इतिहास में पंडित जवाहरलाल नेहरू एक ऐसा राजनेता रहे हैं जो इतने लंबे समय तक भारत के प्रधानमंत्री बने रहे। आजाद भारत के पहले वो मनोनीत प्रधानमंत्री हुए फिर 1952 चुनाव में इलेक्टेड प्रधानमंत्री बन गए थे। अंग्रेजों ने भारत को बड़ी जर्जर हालत में उसके हाथ छोड़ गए थे।  जिसे पटरी पर लाना इतना आसान काम नहीं था। 

पंडित जवाहरलाल नेहरू के लिए देश से बड़ा कोई नहीं था। खुद भी नहीं। हमेशा वो देश और देशवासियों से जुडा महसूस करते। बच्चे उन्हें बहुत प्यारे लगते, बच्चों में वो देश का भविष्य देखते थे। 

पंडित नेहरू के लिए देश सेवा प्रथम था। अंग्रेजों से उन्हें कंगाल भारत मिला था। देश की संपत्ति तितर बितर हो चुका था। देश भी तीन तेरह में सब बंटा हुआ था। देश विभाजन से अर्थव्यवस्था चरमराई हुई थीं, उसे ठीक करना था। कबिलाई राज्यों ने फिर से सिर उठाने की हिमाकत कर रहे थे, उन्हें एक सूत्र में बांधने का जिम्मा सरदार पटेल ने अपने कंधे ले रखी थीं। सबसे बड़ी चुन्नौती देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का था और रोजगार के अवसर सिर्जन करना था। इसी को ध्यान में रख कर उन्होंने देश में पंचवर्षीय योजना चलाई, अपने कार्यकाल में देश के लिए कई योजनाओं, परियोजनाओं की नींव रखी, और कार्य की शुरुआत की। 1961 में उनके कार्यकाल में आई आई टी, आई आई एम और एम्स की स्थापना की, फिर दो साल बाद 1963 में भाखड़ा- नांगल बांध परियोजना देश को देश को समर्पित किये । इसी बीच चीन हमले हुए, ताशकंद समझौता हुआ और दुनिया को पंचशील सिद्धांत मिला। देश में कल कारखानों का विस्तार हुआ।बोकारो इस्पात प्लांट भी 1964 में उन्हीं के कार्यकाल में नीवं पडी जिसे 1975 में इंदिरा गाँधी ने उदघाटन की थी। बोकारो आज एशिया का सबसे बड़ा इस्पात प्लांट के रूप में जाना जाता है। देश के प्रति नेहरू का एक विजन था,एक विकसित भारत का। वहीं पूर्ण स्वराज के प्रति संकल्पित नेहरू ने देशवासियों को ” आराम- हराम ” का नारा दिया और देश को आगे बढाने का संकल्प दुहराया। इतना ही नहीं, आधुनिक भारत के निर्माण में पंडित जवाहरलाल नेहरू का योगदान अद्वितीय है। उन्होंने देश को एक लोकतांत्रिक और वैज्ञानिक रूप भी दिया। जो देश और संविधान के लिए बहुत जरूरी था ‌। यह था नेहरू का पुराना भारत  ! 

     मोदी का नया भारत  ! 

9 जून का सबसे लंबे समय तक किसी लोकतांत्रिक देश का प्रधानमंत्री का रिकॉर्ड टूट रहा है और इसे तोड़ने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है मंहगाई के बादशाह नरेंद्र मोदी जी को। मंहगाई और भ्रष्टाचारियों से तंग भारतीयों ने 2014 में मनमोहन सिंह संचालित कांग्रेस सरकार को लात मारी थीं और आर एस एस संचालित भाजपा को केन्द्र की सत्ता सौंप दी थीं। यह उसी तरह का सौंपना था जैसे कोई बाप बेटी की गलत हरकतों से तंग आकर उसकी शादी एक ऐसे शातिर दुल्हे से कर देता है जो पहले से ही शादीशुदा और कानून का भगौड़ा होता है । न उसकी जात, न जमात और न उसका आगा पीछा पूछा जाता है, जिस दुल्हे को सुशील और सदगुण संपन्न बताया गया था वो तो हत्यारा निकला था। बाद में उस बेटी पर क्या गुजरती है, यह जानने का भी समय किसी के पास नहीं होता है ‌। कुछ ऐसी ही जल्दबाजी देशवासियों ने 2014 में किया था। उस घड़ी देशवासियों को 55 रूपये मिलने वाली पेट्रोल डीजल मंहगी लगी थीं, साढे़ चार सौ में मिलने वाली गैस मंहगी लगी थी, पचास पचपन में मिलने वाला सरसों तेल मंहगी लगी थी और तो और साठ पैंसठ में मिलने वाली दाल भी बहुत मंहगी लगी थी। लोग गुस्से में आकर सरकार के ख़िलाफ़ सडकों पर गीत गाते थे ” सैंया बहुत कमात है,मंहगाई डायन खात जात है। ”  उसी गुस्से को भाजपाईयों ने अपना वोट बना लिया था। तब उन्माद में भाजपाईयों ने यहां तक कह दिया था ” देश को आज आजादी मिली। उनके कथनानुसार भारत 1947 में आजाद नहीं हुआ था, बस सत्ता का हस्तांतरण हुआ था। भारत को असली आजादी 2014 में मिली। अब देश में राम राज्य आयेगा। भाजपाईयों का यही सुर और ताल था। देशवासियों को भी ऐसा ही लगा था जब मोदी जी ने चुनाव जीत कर संसद की सीढियों पर माथा टेकते हुए देश की सत्ता पर काबिज हुए था। आर एस एस का सालों का सपना साकार हो गया था। अच्छे दिन आयेगा का वायदा कर मोदी  सत्ता हथियाने में कामयाब हुआ था। दूसरे शब्दों में अच्छे दिन आयेगा और राम आयेंगे के वायदे के साथ मोदी सत्ता के शिखर तक पहुंचने में कामयाब हुआ था। बहुत दिन नहीं बीता और मोदी पूंजीपतियों के लिए काम करना शुरू कर दिया था। सबसे पहले उसने अपने दोस्त अम्बानी के लिए काम किया और इसके लिए उसने भारतीय दूर संचार निगम लिमिटेड को पंगु किया और दोस्त अम्बानी के प्राइवेट जियो कंपनी का लांच किया । उदेश्य था दोस्त को लाभ पहुंचाना। पहले के पांच साल में मोदी ने देश में ऐसे ऐसे काम किए जिस पर देश की जनता पूरी तरह कन्फ्यूज हो गई। सोचने लगे कि उसने भारत के प्रधानमंत्री को चुना है कि भाजपा के प्रधानमंत्री को। प्रधानमंत्री की कार्यशैली से लगने लगा था कि मोदी को जनता ने नहीं कारपोरेट ने अपने लिए नौकर चुन लिया है ‌‌। मोदी वही करने लगा था जो उनके कारपोरेट दोस्त कहते या चाहने लगे थे। इसी बीच मोदी सरकार ने 8 नवंबर 2016 को मध्य रात्रि में नोटबंदी की घोषणा कर जनता को बड़ी तगड़ा झटका दिया और सबको रोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया। पूराने 500 और 1000 के नोट को लेन देन की प्रचलन से बाहर कर दिया। पूरा देश में जैसे भूचाल आ गया। हर तरफ अफरातफरी का माहौल। नोट जमा करने का अल्टीमेटम देशवासियों को दे दिया गया। पूरा देश बैंकों के बाहर लाइन में खड़े हो गये। इस अफरातफरी में कितनो की जान चली गई। बहुतों को लू लग गया। कितने धूप में चक्कर खाकर गिर पड़े थे। गाँव की ऐसी औरतें जो अभी तक बैंक का मुंह नहीं ताकि थीं । खेती बारी कर साग सब्जी बेच कर, दस दस, बीस बीस का नोट जोड़ जोड़ कर बड़ा नोट तैयार करने में लगी रहती थीं। नोटबंदी ने उन्हें सकते में डाल दिया था। अब वो पागलों  की तरह दौडती फिर रही थीं, ” बाबू, मेरा पैसा बदल दो, बैंक में खाता नहीं है..!” कहती-  गिडगिडाती आपको भी नज़र आती होगीं। 

सरकार की ओर से नोटबंदी का उद्देश्य  काला धन को बाहर लाना बताया गया था। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना और आंतकवाद की फंडिंग को रोकना भी मकसद में शामिल था। लेकिन देश की जनता ने अपनी फटी आंखों से जो देखा कि न तो काला धन बाहर आया, न भ्रष्टाचार में अंकुश लगा और नाही आंतकवाद का फंडिंग रूका। उल्टे इन सभी में चार गुणा और वृद्धि होने की खबरें आती रही। हां इस नोटबंदी से भाजपा और आर एस एस को जबदस्त फायदा हुआ था ‌। बरसों से अधुरा पडा दोनों का आलिशान और शानदार आफिस बन कर तैयार हो गया। देश की जनता सर धूनती रह गई। जानकारों ने इसे मोदी सरकार का पहला मास्टर स्ट्रोक माना था। 

 अभी देश की जनता नोटबंदी की मार से ठीक से उबर भी नहीं पाई थी कि मोदी सरकार ने 1 जुलाई 2017 की मध्य रात्रि को केन्द्रीय कक्ष में वर्तमान राष्ट्पति प्रणव मुखर्जी की उपस्थिति में देशवासियों के माथे पर एक काला कानून जीएसटी बिल थोपने चली आई। यह गब्बर टैक्स वसूली बिल था। राजा हरिश्चंद्र के राज में श्मशान घाट में डोम कफ़न टैक्स लेता था तब मुर्दा जलाने की अनुमति मिलती थी। मोदी सरकार ने भी यह परम्परा कायम रखी और कफ़न पर भी जीएसटी टैक्स लगा दिया। यही नहीं मोदी सरकार ने खाने से लेकर पहनने ओढने और मूतने से लेकर चलने फिरने पर भी सरकार को टैक्स देने पर जनता को मजबूर कर दिया गया था। बस और रेल भाडों में बेतहाशा बढोत्तरी कर दी गई थीं। दो रूपये में मिलने वाला प्लेट फार्म टिकट बीस रूपये कर दिया गया था। सिनियर सिटीजन का रेलवे छूट समाप्त कर दिया गया। मोबाइल रिचार्ज से लेकर बैंकिंग लेन देन में जीएसटी लागू कर दिया गया।  इससे आम आदमी का जीवन जैसे ठहर गया था। देश के छोटे छोटे कारोबारियों को तो जैसे लकवा ही मार दिया था। समानो की कीमतों में जबरदस्त उछाल आ गया था। कितने कारोबारियों के हाथ से छोटे छोटे काम धंधे और दुकान छुट गये, कितने स्वर्ग सिधार गये। कितनों ने फांसी लगा ली। लेकिन मोदी सरकार पर इसका घंटा कोई फर्क  नहीं पड़ा। मोदी सरकार ने अच्छे दिन का वायदा किया था। अभी राम को भी लाना बाकी था।  देशवासियों को चक्कर पर चक्कर आने लगा। किसी को समझ में यह नहीं आ रहा था कि मोदी के रूप में वो देश का प्रधानमंत्री  चुने है कि कोई बड़ा पनौती को चुन लिया गया है। शोले फिल्म में गब्बर सिंह का अपना कोई नहीं था, फिर भी वो लूट‌ मार कर जनता को परेशान करते रहता था। मोदी के रूप में देश वासी गब्बर सिंह को याद करने लगे थे। नरेंद्र

 मोदी जी देश के लिए पनौती ही साबित हुए। खुद को देश का चौकीदार कहने वाले मोदी के राज में विजय माल्या, नीरव मोदी जैसे कई गुजराती चोर लोन के नाम पर कई बैंकों को लूट कर विदेश भाग गए, जिन्हें मोदी सरकार आज तक देश वापस ला नहीं सकी, इधर देश के भीतर कितने बडे़ बडे़ कारोबारियों के लोन माफ़ कर दिए इसी मोदी सरकार ने, वहीं अनेकों कर्जदार किसानों को मरने पर मजबूर भी कर दिया इसी मोदी सरकार ने। अब तो साफ़ तौर पर देखा जा रहा कि अप्रत्यक्ष रूप से देश अडानी चला रहा है। वो जहां चाह रहा है, जमीन हडप ले रहा है, सरकारी संस्थाओं को खरीद रहा है, पोर्ट खरीद रहा है, एयर पोर्ट खरीद ले रहा है, मोदी भी शायद यही चाह रहा है कि उसका दोस्त इस देश को ही खरीद ले। देशवासियों के भविष्य को अपनी मुठ्ठी में कैद कर ले। एक गुजराती देश बेच रहा है और दो गुजराती उसे खरीदने में लगा है। यही जुमला सारे आम देखा जा रहा है। 

मोदी सरकार देश के लिए किस तरह मनहूस साबित हुआ है वो आप करोना काल में देख ही चुके हैं। जब अंहकारी और सनकी मोदी ने पूरे देश में लाक डाउन की घोषणा कर दी। जिस कारण लाखों लोगों की नौकरियां चली गई। हजारों उधोग धंधे बंद हो गये जो आज तक खुले नहीं। लाखों लोग सडकों पर आ गए और हजारों ने जाने गवां दी। सरकार ने भी किसी की कोई सुधि नहीं ली और अय्याशी की नींद सोते रहे मोदी जी। उस करोना के कारण एक बार जो बिखर गया, दुबारा उसका घर नहीं संभला। 

अभी पूरे देश में नफरत का जहर उगला जा रहा है ‌। हिन्दू मुस्लिम के भाई चारे पर मोदी ने  नफ़रत का सान चढ़ा दिया है। 

बारह सालों में मोदी सरकार ने देश में सिर्फ नफ़रत फैलाने का काम किया और देश की सरकारी संस्थाओं को प्रावेट के हाथों बेचने का काम किया। 

और ऐसा करने के लिए आपने उसका पूरा पूरा साथ दिया है। दो बार तो आपने जिताया और तीसरी बार मोदी को ईवीएम ने जीता दिया है। 

अभी तक के कार्यकाल में मोदी ने 96 देशों का 77 बार दौरा किया और विदेश नीति का बंटाधार कर दिया। रूस और ईरान जैसे मित्र राष्ट्र विदक गये और भारत अमेरिका का गुलाम बन गया। आज भारत की अस्तित्व और अस्मिता दोनों खतरे में आ गया है दोस्तों। 

9 जून को मोदी पंडित जवाहरलाल नेहरू का सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री के रूप में सत्ता में रहने का रिकॉर्ड तोड़ने जा रहा है ‌।  पर एक बात आपको भी पता होगा कि राजनीति में नेताओं के कामों का मुल्यांकन होता है चाम( चमड़ी) का नहीं। मोदी भले नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दें, अधिक समय तक सत्ता में चिपके रहने का अपना रिकॉर्ड बना लें। लेकिन मोदी नेहरू नहीं हो सकता है। नेहरू विकास पुरुष थे और मोदी देश के लिए  विनाश पुरुष, कंलक, और पनौती साबित हो रहा है। जब से मोदी सत्ता की कुर्सी पर बैठा है, देश को बेच ही रहा है। कभी सेल, कभी रेल, कभी भेल तो कभी एल आई सी, कभी पोर्ट तो कभी एयरपोर्ट, नेहरू, इंदिरा गाँधी की बनाई सरकारी संस्थाओं को मोदी बेचने का रिकॉर्ड बना रहा है। 

आज देश में मोदी का दौर है, ईवीएम प्रधानमंत्री के रूप में भी मोदी का बडा शोर है, दो चुनाव उसने राम और राशन के भरोसे जीते, काम के बल पर नहीं। बारह सालों में राष्ट् के नाम पर कोई सरकारी संस्था को जन्म तो नहीं दे सका मोदी, उल्टे हजारों स्कूल कॉलेज बंद करवा दिया इन्होंने, 

कांग्रेस सरकार में मंहगाई डायन कहलाती थी मोदी सरकार में मंहगाई भाजपाईयों की रखैल बन गयी है। कभी भ्रष्टाचार देश का कलंक कहलाता था। मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार पलंग पर मेवा मलाई खा रहा है। एक ऐसा भी दौर था जब रुपये का मूल्य गिरने से देश के प्रधानमंत्री की गरिमा गिरने की बात कही जाती थीं, जब से मोदी सत्ता में आया है रूपये का गिरना तेजी से जारी है लेकिन बेशर्म मोदी लवर ब्याय की तरह मेलोडी ट्राफी खाने खिलाने में मशगूल है ‌। जो देश अमेरिका के आगे झूका नहीं था, उसकी धौंस का डटकर सामना करता रहा, उसी भारत की अस्मिता को मोदी ट्रम्प के आगे गिरवी रख दिया है। आज भारत अमेरिका की जी हुजूरी कर रहा है और मोदी ट्रम्प के आगे नाच रहा है। फिर भी बेशर्म की तरह कहता है हम विश्व गुरु बनेंगे। शैक्षणिक संस्थानों को तहस नहस कर कोई विशव गुरु बना है मोदी सरकार  ??.! 

अब आपको तय करना है कि एक सम्प्रभुता संपन्न भारत चाहिए या अमेरिका का गुलाम भारत। मोदी रहा तो भारत आजाद नहीं रहेगा, यह पक्का है  !! 

श्यामल बिहारी महतो

बोकारो, झारखंड

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