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वो दो मिनट

एक लड़की थी। उसका नाम था मानसी। एक दिन सुबह उसकी माँ बोली ‘‘मानसी उठ जाओ, सुबह हो गई है, तुम्हें स्कूल के लिए देर हो रही है..!’’

मानसी ने कहा, ‘‘माँ, मैं बस दो मिनट में उठ रही हूँ..! ’’

उसकी माँ गुस्से में कहती है, ‘‘जल्दी जल्दी उठो, दो मिनट की बच्ची वरना तुम्हारी स्कूल बस चली जायेगी..! और तुम्हारी स्कूल छूट जायेगी..! फिर तुम्हें छोड़ने पापा को जाना पड़ेगा।’’

मानसी की सबसे खराब आदत यह थी कि वो सुबह देर तक सोती माँ बार बार आवाज देती, परन्तु उसे अनसुना करती, किसी किसी दिन हड़बड़ा कर उठती, जैसे तैसे, दांत साफ़ करती, किसी किसी दिन तो वह बिना पखाना किये, लंच बॉक्स बैग में ठूंसती और स्कूल चली जाती, लंचटाइम में सभी बच्चे खाते पर मानसी को खाने की इच्छा नहीं करती, जबरन खाने की कोशिश करती, पर खिलाता नहीं। किसी दिन तो लंच बॉक्स भरा का भरा घर वापस आ जाता। माँ डांटती। वह चुप रहती। फ्रेस होने के लिए पखाना घर में देर तक बैठी रहती। माँ चिल्ला कर कहती, ‘‘और सुबह देर तक सोते रहो, सुबह का काम दोपहर को करेगी तो खाने का मन कहाँ से करेगा..!“

उस दिन भी जब तक मानसी उठती है, सचमुच में तब तक उसकी स्कूल बस जा चुकी थी। इस पर उसकी माँ उसे खूब डांट रही थी। तभी पास आकर उसके पापा बोलते है, ‘‘मानसी तुमको ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि तुम माँ से जो दो मिनट माँग रही थी, उस दो मिनट में तुम नहा लेती, इससे तुम्हारा तन और मन दोनों तरोताजा हो जाता। लेकिन तुमने वो समय गवां दिया और बस भी छूट गयी।’’

‘‘सॉरी पापा! अब आगे से ऐसा नहीं करूँगी..!“

मानसी को समय का महत्व समझ में आ गयी थी। अब वो सारे काम समय पर करती। समय पर होम वर्क करती है समय पर स्कूल जाती थी। यह देख मानसी के मम्मी पापा दोनों बहुत खुश थे क्योंकि उसकी बेटी समय की महत्व को समझ गयी थी।

मुस्कान महतो

बोकारो, झारखंड

( उम्र: 10 वर्ष, कक्षा चार, अय्यपा पब्लिक स्कूल बोकारो, झारखंड)

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