सनातनधर्म के आधारभूत धर्मग्रन्थ वेदों को किसने लिखा?
बहुत बार यह पूछा जाता रहा है कि जब हर ग्रन्थ का कोई लेखक होता है तो अपने सनातनधर्म के आधारभूत धर्मग्रन्थ वेदों के लेखक कौन हैं…..??
उपरोक्त प्रश्न के ज़बाब में सुधी पाठकों के ध्याननार्थ बताना चाहता हूँ कि सृष्टि की उत्पत्ति के समय से ही प्रभु ब्रह्माजी सर्वशक्तिमान देवों के देव महादेवजी की आराधना की।परम पिता परमेश्वर शिवशंकरजी उनकी तपस्या के फलस्वरूप उनको ज्ञान प्रदान किया। तत्पश्चात् ब्रह्माजी ने सृष्टि के आरम्भ में अपने चार मुखों से इस ज्ञान को प्रकट कर अपने मानस ऋषिपुत्रों को, उनकी तपस्या से प्रसन्न हो कर इनके हृदय में प्रकट किया।कालान्तर में ये ही ज्ञान वेद कहलाये क्योंकि इन चारों ऋषियों ने इस ज्ञान को वेदों के रूप में संकलित किया था।
उपरोक्त वर्णित से आप को यह तो ज्ञात हो ही गया कि ये चारों ऋषि ब्रह्माजी के ही अंश अर्थात् उनके पुत्र थे। इसी कारण से इन चारों ऋषियों की तपस्या से प्रभावित हो प्रभु ब्रह्माजी ने इन्हें जो ज्ञान दिया वो इस प्रकार है –
1- ‘‘अग्नि’’ ऋषि को ऋग्वेद का जिसमें मुख्य रूप से देवताओं (अग्नि, इन्द्र, वरुण, आदि) की स्तुति में मन्त्र, प्रार्थनायेँ और भजन संकलित हैं। इसमें 1028 सूक्त (भजन) हैं, जो 10 मण्डलों में व्यवस्थित हैं। इन प्रार्थनाओं को ऋचायेँ भी कहा जाता है। विश्व प्रसिद्ध गायत्री मन्त्र भी ऋग्वेद का ही हिस्सा है (मंडल 3.62.10)
2- ‘‘वायु’’ ऋषि को यजुर्वेद का जिसमें यज्ञ और कर्मकाण्ड के बारे में है।इसे मुख्य रूप से यज्ञों के आयोजन, विधियों और अनुष्ठानों के लिए समर्पित माना जाता है क्योंकि यह यज्ञ कैसे किए जाने चाहिये अर्थात यह एक मार्गदर्शक के रूप में है।
3- ‘‘आदित्य’’ ऋषि को सामवेद का जिसमें भारतीय संगीत का विवरण है। इस वेद ने भारतीय संगीत को आध्यात्मिक और रचनात्मक आधार प्रदान किया है क्योंकि इसमें भारतीय संगीत का मूल स्रोत और विवरण है। यहाँ यह बताना चाहूँगा कि इस वेद में 1875 छंदों का संग्रह है, जो ऋग्वेद के मंत्रों को संगीतमय तरीके से प्रस्तुत करता है।
4- ‘‘अंगिरा’’ ऋषि को अथर्ववेद का जिसमें औषधि (चिकित्सा) और जादुई मन्त्रों (जादू-टोना/अभिचार) का विवरण मिलता है। यह चौथा वेद है, जो मुख्य रूप से दैनिक जीवन, रोगों के उपचार, लम्बी आयु, सुख-समृद्धि, शत्रु नाशक मन्त्रों, और रक्षात्मक तान्त्रिक विद्याओं का संग्रह है। इसी कारण से इस वेद को विज्ञान, मनोविज्ञान और चिकित्सा का मिश्रित ज्ञान मानते हैं, जिसमें मन्त्रों का उपयोग मानसिक शक्ति बढ़ाने के लिए किया जाता है।
वेदों को श्रुति (सुना हुआ ज्ञान) भी कहते हैं, क्योंकि ऋषियों ने इन्हे सुना और सुनाया… कालान्तर मे इन्हीं श्रुतियों ने ग्रन्थो का रुप लिया।

गोवर्द्धन दास बिन्नानी ‘‘राजा बाबू’’
जय नारायण व्यास कॉलोनी, बीकानेर