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उपेक्षा

‎अरे तुम यहाँ! तुम्हें तो कोई पूछता भी नहीं होगा। हा…..हा….ही…..ही….!! जोरों से व्यंग भरी हँसी, तिरछी मुस्कान…जैसे हृदय में कोई तीर चुभा रहा हो। तुम्हें यहाँ जीने का कोई अधिकार नहीं है। अपनी हालत देखी है कभी तुमने? हमें देखो जब कोई युवती अधिक सुंदर दिखती है तो लोग उसे हमारा दर्जा देते हैं कि गुलाब की तरह दिख रही हो, लोग मुझे अपने जीवन में प्रेमपूर्वक स्थान देते हैं; आज की युवा पीढ़ी मेरे बिना अधूरी है। हाँ, और मैं गेंदा; मुझे भी लोग खूबसूरती का पर्याय समझते हैं। हम तो हरि चरणों तक भी समर्पित हो जाते हैं और तुम्हें तो ईश्वर तक अपने आसपास भटकने नहीं देते। छी….. छी……. कितनी बदबू है तुम्हारे अंदर…..!

‎गुलाब और गेंदा अपनी नाक पंखुड़ियों से ढँकने लगे।

‎भगवान ने प्रकृति में कोई भी चीज अनावश्यक नहीं बनाई है, हर चीज की कीमत वक्त आने पर ही पता लगती है। मेरी भी अस्मिता है, मेरे दामन में दाग लगाने का आपको कोई अधिकार नहीं है।

‎बेशरम का पौधा पत्तियां हिलाते हुए बोला।

‎तुम किस अस्मिता की बात कर रहे हो; बेशरम! जिसके नाम में ही बेशरम हो और कूड़े के ढेर में जीवन जीता हो, वो हमें अस्मिता की बातें कह रहा है। गुलाब का पारा मान लो सातवें आसमान पर था। जब कोई व्यक्ति बार-बार समझाने से भी न समझे तो उसे तुम्हारा नाम दिया जाता है बेशरम! हँसी आसमान तक गूँजने लगी।

‎देखो गुलाब और गेंदा भाई आप का अभिमान बढ़ता ही जा रहा है; ये अच्छी बात नहीं है, कभी किसी को अपने से निर्बल नहीं समझना चाहिए। इतना बोलकर बेशरम का पौधा बहस न करना ही उचित समझा और शांत हो गया।

‎तभी एक वृद्ध और उनके साथ एक छोटा बच्चा आते हुए दिखाई दिए। गुलाब बोला- ‘‘बेशरम अभी पता चल जाएगा किसकी कीमत कम है और किसकी नहीं। वृद्ध के साथ बच्चा है, वो हमें अपने घर ले जाने की बात कहेगा और तुम्हें शायद……!’’

‎पास आते ही बच्चा एक पत्थर से टकरा गया, एक हाथ पर गुलाब के कांटे चुभ गए और रक्त निकलने लगा। बच्चा रोने लगा; तभी वृद्ध व्यक्ति बच्चे को शांत करते हुए बोले- ‘‘बेटा! अभी ठीक हो जाएगा तुम चिंता ना करो।’’ बेशरम का पत्ता तोड़, थोड़ा कुचल कर बच्चे के घुटने और हाथ में लगा दिया; रक्त निकलना तुरंत बंद हो गया। बच्चा वृद्ध को धन्यवाद करने लगा; तभी वृद्ध व्यक्ति बोले- ‘‘धन्यवाद मुझे नहीं, ये बेशरम के पौधे से कहो, बेटा! इसने तुम्हारे चोट पर मरहम लगाया है। न जाने इसे बेशरम क्यों बोलते हैं लोग; ये तो जड़ी बूटियों के काम आते हैं और गुलाब से ज्यादा उपयोगी है। इस धरती पर सभी चीजें कीमती हैं। बस….मूल्य पता होना चाहिए।’’

‎गुलाब और गेंदा शर्म से पानी पानी हो गए और बेशरम से नज़रें नहीं मिला पा रहे थे।?

प्रिया देवांगन ‘‘प्रियू’’

गरियाबंद छत्तीसगढ़

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