नायक शेष नाथ सिंह यादव, वीरगति प्राप्त
ऑपरेशन विजय पाकिस्तान के साथ लड़ा गया वह युद्ध है जो कि पूर्णरूप से धोखे पर आधारित था | सर्दियों में जब दोनों देशों की सेनाएं बंकर खाली कर पीछे चली जाती थीं, तब इस मौके का फायदा उठाकर पाकिस्तानी सेना हमारी सीमा में घुस आयी और पहाड़ियों पर स्थाई बंकर बनाकर बैठ गयी | 03 मई 1999 स्थानीय चरवाहे ताशी नामग्याल ने अपने खोये हुए याक को खोजते समय बटालिक सेक्टर में पहाड़ियों पर कुछ संदिग्ध गतिविधियां देखीं। उन्होंने पाकिस्तानी सैनिकों को पठानी पोशाक में बंकर खोदते हुए देखा | उन्होंने तुरंत भारतीय सेना को इसकी जानकारी दी। तब हमारी सेना एक्शन में आयी और उन घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए विस्तृत योजना पर काम करने लगी |
ऑपरेशन विजय के समय नायक शेष नाथ सिंह यादव 547 एफ आर आई में तैनात थे । जून 1999 में 547 एफ आर आई को 5 गार्ड्स के साथ कारगिल की ओर आगे बढ़ने की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी ताकि पाकिस्तान के घुसपैठयों को खदेड़ा जा सके, जिन्होंने तोलोलींग, टाइगर हिल और आस-पास की पहाड़ियों पर कब्जा जमा लिया था। 5 गार्ड्स के एक दल को 56 माउंटेन ब्रिगेड के तहत 2 राजपूताना राइफल्स के साथ तैनात किया गया था ।11 जून 1999 को कर्नल एम.बी. रविंद्रनाथ के नेतृत्व में 2 राजपूताना राइफल्स को तोलोलिंग चोटी पर पुन: कब्ज़ा करने की जिम्मेदारी सौपी गयी थी ।
युद्ध के दौरान नायक शेष नाथ सिंह यादव 5 गार्ड्स की टुकड़ी के साथ काम कर रहे थे । इनका दल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइलों से लैस था । इन्फैंट्री यूनिटों के सैनिक पाकिस्तानी सेना पर हमले कर रहे थे और इनका दल अपनी इन्फैंट्री यूनिटों को सपोर्ट प्रदान कर रहा था । 15 जून 1999 को जब यह दल आगे बढ़ रहा था उसी समय पाकिस्तानी सेना के तोपखाने से भीषण फायरिंग होने लगी । इस पाकिस्तानी हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और गहरी चोटों और तेजी से होते रक्तश्राव के कारण वीरगति को प्राप्त हो गए।
नायक शेष नाथ सिंह यादव का जन्म 01 अगस्त 1966 में जनपद गाजीपुर के ग्राम बागी में श्रीमती नंगी देवी और श्री बलदेव यादव के यहाँ हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव के स्कूल से पूरी की और आगे की पढ़ाई शहीद इंटर कॉलेज, नंदगंज से पूरी की और 18 अगस्त 1984 को भारतीय सेना की ई एम ई कोर में भर्ती हो गए । इनका विवाह सुश्री सरोज से हुआ । इनके परिवार में इनकी पत्नी श्रीमती सरोज देवी, बेटा शिव यादव तथा दो पुत्रियां सीमा और सपना हैं , दोनों बेटियों का विवाह हो चुका है। नायक शेष नाथ सिंह यादव के माता पिता की मृत्यु हो चुकी है।
नायक शेषनाथ सिंह यादव की वीरता और बलिदान को अमर बनाने के लिए उनके परिजनों ने अपने खर्चे से एक प्रतिमा का निर्माण करवाया है। उनके परिवार को सरकार द्वारा आवंटित गैस एजेंसी पर भी उनका नाम लिखा हुआ है। उनके परिजन हर साल उनके वीरगति दिवस को बहुत ही शिद्दत से मनाते हैं। उनकी पत्नी का कहना है कि वीरगति के समय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा जमीन देने की बात की गयी थी लेकिन अब तक वह नहीं मिली है। कुछ जमीन पट्टे में दी गयी थी लेकिन वह भी किसी और के नाम कर दी गई है।
वीरगति प्राप्त सैनिकों के परिजनों के साथ इस तरह की वादाखिलाफी की घटनाएं बहुत शर्मनाक हैं। जिस सैनिक ने देश की रक्षा में बिना अपने परिवार के बारे में एक पल सोचे सर्वोच्च बलिदान दिया, आज उसी वीरगति प्राप्त सैनिक का परिवार प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। जिलाधिकारी गाजीपुर और जिला सैनिक कल्याण अधिकारी गाजीपुर से अनुरोध है कि नायक शेषनाथ सिंह यादव के परिजनों की बातों का संज्ञान लें और वीरगति प्राप्त सैनिक शेषनाथ सिंह यादव को उनके हिस्से का सम्मान दिलाने में मदद करें।
उनकी पत्नी का यह भी कहना है कि नायक शेषनाथ सिंह यादव के नाम पर उनके गांव में एक शौर्य द्वार और एक सड़क का नामकरण होना चाहिए। यदि सरकार चाहती है तो उस प्राइमरी पाठशाला का नामकरण भी नायक शेषनाथ सिंह यादव के नाम पर कर सकती हैं जिससे उन्होंने पढाई की है। इस तरह का कदम गांव की नवयुवा पीढ़ी में देशभक्ति की भावना का संचार करेगी।

हरी राम यादव
सूबेदार मेजर आनरेरी
अयोध्या/ लखनऊ