चलता फिरता घर है मेरा
चलता फिरता घर है मेरा,
चार चके हैं नीचे।
दौड़ लगाता है सड़कों पर,
अपनी आँखें मीचे।
चलता फिरता गाना गाता,
हवा संग उड़ जाता।
जहाँ चाहता रुक जाता है,
पर्वत पर चढ़ जाता ।
सूरज के संग मुस्काता है,
चंदा संग हँसता है।
रिमझिम बारिश होती है तब,
बूंदों संग नचता है।
सभी खिड़कियाँ रंग बिरंगीं,
दरवाजे भी प्यारे।
चलते फिरते मेरे घर के,
सबने पैर पखारे।
छोटे-छोटे सपने लेकर,
इसे दूर तक जाना।
फुलबगियों की खुश्बू लेकर,
इतराना मस्ताना।
चलता फिरता घर है मेरा,
मस्ती भरी कहानी।
आज बनाकर लाई ये घर,
मेरी प्यारी नानी।

प्रभुदयाल श्रीवास्तव
छिंदवाडा (मध्य प्रदेश)