कोई खास नही
तुम दिल की इतनी भोली हो,
जैसे मछली को प्यास नही,
कोई पूछे तुमसे कौन हूँ मैं,
तुम कहना कोई खास नहीं।
तू कहना कोई खास नही,
कोई पागल है या आवारा,
या होगा कोई बुद्धू सा,
या प्यार मे पागल बेचारा।
दिन रात बिखरता टूटके वो,
कोई था जो,
अब उसके पास नही,
कोई पूछे तुमसे कौन हूँ मैं,
तुम कहना कोई खास नहीं।
कई वादे बिन पूछे करके,
कई तोड़े जोड़े पूछ के वो,
हमको करके बदनाम यहाँ,
बिच राह मे छोड़े रूठ के वो।
तुम जब रुठे मै प्यार किया,
मै रुठा तो,
मुझमें ना रास कोई,
कोई पूछे तुमसे कौन हूँ मैं,
तुम कहना कोई खास नहीं।
तेरे खास नही थे बेगाने,
अब बेगाने तेरे यार हुए,
चुपके-चुपके से मिल-मिल के,
कई बरसो से तुम्हे प्यार हुए।
जब गैरो से तुम्हे प्यार हुआ,
आना मेरे ना पास कभी,
कोई पूछे तुमसे कौन हूँ मैं,
तुम कहना कोई खास नहीं।

शिव शंकर (शिवा), गाजीपुर (उत्तर प्रदेश)